भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र के यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक पर बड़ा एक्शन लेते हुए उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि बैंक के पास ना तो पर्याप्त पूंजी बची है और ना ही भविष्य में बेहतर आय की कोई मजबूत संभावना दिखाई दे रही है। इसी वजह से बैंक को आगे संचालन जारी रखने की अनुमति नहीं दी गई।
आरबीआई के फैसले के बाद अब यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक 19 मई 2026 को कारोबार बंद होने के बाद किसी भी तरह की बैंकिंग गतिविधि नहीं कर सकेगा। यानी बैंक अब ग्राहकों से जमा स्वीकार नहीं करेगा और ना ही सामान्य बैंकिंग सेवाएं जारी रख पाएगा।
बैंक बंद करने के निर्देश भी जारी
आरबीआई ने अपने बयान में बताया कि महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को भी जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। इनमें बैंक को बंद करने और उसके लिए परिसमापक (Liquidator) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। इस फैसले के बाद अब बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा नियमानुसार किया जाएगा। ऐसे मामलों में परिसमापक की भूमिका काफी अहम होती है, जो बैंक की वित्तीय स्थिति को संभालने और भुगतान प्रक्रिया को पूरा करने का काम करता है।
जमाकर्ताओं को कितना पैसा मिलेगा?
आरबीआई ने साफ किया है कि बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) के नियमों के तहत राहत मिलेगी। बैंक के परिसमापन की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि मिल सकती है।केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर करीब 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है। यह ग्राहकों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।आरबीआई ने यह भी बताया कि 20 अप्रैल 2026 तक डीआईसीजीसी की ओर से पहले ही 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे साफ है कि ग्राहकों के पैसे लौटाने की प्रक्रिया पहले से जारी थी।
नियमों का पालन करने में विफल रहा बैंक
आरबीआई के मुताबिक, यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कई प्रावधानों का पालन करने में असफल रहा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंक की मौजूदा आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी और उसका संचालन जमाकर्ताओं के हितों के लिए जोखिम बन सकता था।आरबीआई ने कहा कि वर्तमान वित्तीय हालात में बैंक अपने मौजूदा ग्राहकों की पूरी जमा राशि लौटाने में सक्षम नहीं था। ऐसे में उसे आगे कारोबार जारी रखने की अनुमति देना जनहित के खिलाफ माना गया।
सभी बैंकिंग सेवाओं पर लगी रोक
लाइसेंस रद्द होने के साथ ही बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब बैंक ना तो नई जमा स्वीकार करेगा और ना ही ग्राहकों को सामान्य लेनदेन की सुविधा दे पाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले 12 मई 2026 को भी आरबीआई ने सर्वोदय सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया था। उस समय भी केंद्रीय बैंक ने पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाओं की कमी को मुख्य वजह बताया था।
स्त्रोत: https://ddnews.gov.in/rbi-revokes-banking-license-of-yashwant-co-operative-bank/
