भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRTSA) ने 19 मई 2026 को हैदराबाद में आयोजित बैठक के दौरान 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के समक्ष रेलवे के तकनीकी सुपरवाइजरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रखा। संगठन ने अपने पहले से सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर एक विस्तृत प्रस्तुति देते हुए तकनीकी कर्मचारियों की वेतन संरचना, पदोन्नति, भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार की मांग की।
IRTSA का कहना है कि रेलवे के तकनीकी सुपरवाइजर लंबे समय से करियर में ठहराव (Career Stagnation) की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने जूनियर इंजीनियर (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) के वेतन स्तरों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, ताकि उनके कार्यों की जिम्मेदारी, तकनीकी विशेषज्ञता और जोखिमपूर्ण कार्य परिस्थितियों को उचित महत्व मिल सके।
न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹52,600 करने की मांग
संगठन ने अपने ज्ञापन में आधुनिक आर्थिक परिस्थितियों और वेतन निर्धारण के विभिन्न मानकों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन ₹52,600 निर्धारित करने की मांग की। इसके साथ ही रेलवे में सुरक्षा श्रेणी (Safety Category) के पदों के लिए उच्च फिटमेंट फैक्टर लागू करने का भी सुझाव दिया गया।
IRTSA के अनुसार, लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 2.92 माना गया है, जबकि लेवल-6, लेवल-7 और लेवल-8 के पदों के लिए इसे बढ़ाकर 3.50 किया जाना चाहिए। वहीं, वेतन स्तर 9 से 12 तक के मध्यवर्ती पदों के लिए 3.80 का फिटमेंट फैक्टर अपनाने की मांग की गई।
SSE पद को मिले ग्रुप-बी गजटेड दर्जा
संगठन की प्रमुख मांगों में सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) पद को ग्रुप-बी गजटेड श्रेणी में शामिल करना भी शामिल है। IRTSA का कहना है कि वर्तमान में तकनीकी विभागों में ग्रुप-बी पदों की संख्या बेहद कम है, जिसके कारण योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
महासचिव ने दी विस्तृत प्रस्तुति
IRTSA के महासचिव के.वी. रमेश ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से तकनीकी सुपरवाइजरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रखा। इस दौरान 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव ने भी संगठन की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और कई विषयों पर चर्चा की।
बैठक में जूनियर इंजीनियर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर के वेतन स्तरों में मौजूद विसंगतियों, तकनीकी सुपरवाइजरों के लिए लेवल-7 से शुरू होने वाली पांच स्तरीय ग्रेड संरचना, विभिन्न श्रेणियों के बीच वेतन संतुलन तथा रेलवे के तकनीकी विभागों में ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी पदों के वितरण जैसे विषयों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
पदोन्नति में बाधाओं का मुद्दा भी उठा
IRTSA ने आयोग को बताया कि तकनीकी कर्मचारियों, विशेषकर SSE संवर्ग में पदोन्नति के अवसर सीमित हैं। संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि सीधे भर्ती किए गए ग्रेजुएट इंजीनियर भी लंबे समय तक अपने प्रारंभिक पद पर ही बने रहते हैं।
इसके अलावा, प्रशिक्षण अवधि को MACPS (Modified Assured Career Progression Scheme) में शामिल करने, 1 जनवरी 2006 से MACPS लागू करने और इससे संबंधित न्यायालयों के निर्णयों पर भी चर्चा की गई।
तकनीकी कर्मचारियों के भत्तों पर जोर
बैठक के दौरान तकनीकी सुपरवाइजरों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम अलाउंस और प्रोडक्शन कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (PCO) अलाउंस से जुड़े मामलों पर आयोग का ध्यान आकर्षित किया।
IRTSA ने बताया कि लेवल-8 के SSE कर्मचारियों के लिए PCO भत्ता वापस लिए जाने से कर्मचारियों में असंतोष है। संगठन ने रेलवे के प्रोत्साहन (Incentive) सिस्टम की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला और बताया कि यह व्यवस्था रेलवे उत्पादन इकाइयों और कार्यशालाओं की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जोखिम भत्ता और प्रोत्साहन योजना की मांग
महासचिव के.वी. रमेश ने आयोग के समक्ष दुर्घटना-मुक्त सेवा पुरस्कार (Accident-Free Service Award), जोखिम एवं कठिनाई भत्ता (Risk and Hardship Allowance) को ओपन लाइन इंजीनियरों और कर्मचारियों तक विस्तारित करने की मांग रखी।
इसके साथ ही रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित रखरखाव मानकों के आधार पर ओपन लाइन इंजीनियरों और कर्मचारियों के लिए समूह प्रोत्साहन योजना (Group Incentive Scheme) लागू करने का भी सुझाव दिया गया। संगठन का मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और कार्यक्षमता में सुधार होगा।
तकनीकी कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार की उम्मीद
IRTSA ने उम्मीद जताई है कि 8वां वेतन आयोग रेलवे के तकनीकी सुपरवाइजरों की लंबे समय से लंबित मांगों और करियर संबंधी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा। संगठन का मानना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है तो रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों को बेहतर वेतन, पदोन्नति के अवसर और कार्य के अनुरूप सम्मान मिल सकेगा।

यह जानकारी IRTSA द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से साझा की गई है, जिसमें संगठन ने मीडिया से इन मुद्दों को व्यापक और सटीक तरीके से जनता तक पहुंचाने की अपील भी की है।
