RBI का बड़ा फैसला FCNR(B) जमा पर RRB बैंकों को CRR और SLR से मिली छूट, तुरंत लागू हुए नए नियम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks-RRBs) के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक ने FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) जमा से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए कुछ विशेष जमा राशियों को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) बनाए रखने की बाध्यता से छूट देने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में RBI ने 8 जून 2026 को “Reserve Bank of India (Regional Rural Banks – Cash Reserve Ratio and Statutory Liquidity Ratio) Second Amendment Directions, 2026” जारी किए हैं। ये संशोधित निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

गवर्नर की घोषणा के बाद आया फैसला

RBI ने अपने सर्कुलर में बताया कि 5 जून 2026 को गवर्नर द्वारा की गई घोषणा के तहत ताजा FCNR(B) डॉलर फंड जुटाने को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया (US Dollar-Rupee) स्वैप सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया गया था।

इसी पहल के तहत अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा जुटाई गई कुछ FCNR(B) जमा राशियों को CRR और SLR की अनिवार्य शर्तों से छूट प्रदान की गई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित करने में मदद मिलेगी और बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

किन जमा राशियों को मिलेगी छूट?

RBI के अनुसार, 8 जून 2026 से लेकर 30 सितंबर 2026 तक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा जुटाई गई नई FCNR(B) जमा राशियां इस छूट के दायरे में आएंगी। इसमें वे जमा भी शामिल होंगी जिन्हें परिपक्वता (Maturity) के बाद दोबारा नवीनीकृत किया जाएगा।

हालांकि, इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं FCNR(B) जमाओं को मिलेगा जिनकी अवधि न्यूनतम 3 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष होगी।

CRR और SLR से क्या राहत मिलेगी?

सामान्य तौर पर बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा CRR और SLR के रूप में अलग रखना पड़ता है। लेकिन RBI के नए निर्देशों के अनुसार, पात्र FCNR(B) जमाओं पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी।

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि CRR से छूट 1 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली रिपोर्टिंग पखवाड़े (Reporting Fortnight) से प्रभावी मानी जाएगी। इसके लिए 15 जून 2026 को की गई नेट डिमांड एंड टाइम लाइबिलिटीज (NDTL) की गणना को आधार बनाया जाएगा।

जब तक संबंधित जमा राशि बैंक की पुस्तकों (Bank Books) में बनी रहेगी, तब तक मूल जमा राशि पर यह छूट उपलब्ध रहेगी।

नियमों में किए गए संशोधन

RBI ने अपने 2025 के मौजूदा दिशा-निर्देशों में कई आवश्यक बदलाव किए हैं। इसके तहत संबंधित नियमों में नए प्रावधान जोड़े गए हैं ताकि FCNR(B) जमा पर दी गई छूट को औपचारिक रूप से शामिल किया जा सके।

इसके अलावा रिपोर्टिंग और नियामकीय दस्तावेजों में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं। फॉर्म-A के एनेक्सचर में FCNR(B)-2026 से जुड़ा नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिससे बैंकों को रिपोर्टिंग प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी।

क्या होगा इसका असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के इस फैसले से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। CRR और SLR की बाध्यता से राहत मिलने के कारण बैंकों के पास अधिक धन उपलब्ध रहेगा, जिसे वे अन्य उत्पादक गतिविधियों और ऋण वितरण में उपयोग कर सकेंगे।

साथ ही, FCNR(B) खातों में निवेश करने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) को भी बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, क्योंकि बैंक अब इन जमाओं को अधिक सक्रिय रूप से बढ़ावा दे सकते हैं।

तुरंत लागू हुए नए निर्देश

RBI ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं और 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 तथा RBI अधिनियम, 1934 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए केंद्रीय बैंक ने यह निर्णय लिया है।

इस कदम को विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और बैंकिंग क्षेत्र को अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इसका प्रभाव क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जमा वृद्धि और विदेशी मुद्रा संसाधनों पर देखने को मिल सकता है।

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