देश के छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना यानी ECLGS 5.0 ने अपनी रफ्तार से सबको चौंका दिया है। 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद महज कुछ हफ्तों में ही यह योजना एक ऐतिहासिक मुकाम पर जा पहुंची है।
9 जून 2026 तक के आंकड़े देखें तो इस योजना के तहत जारी की गई गारंटियों की कुल तादाद 1,06,549 हो चुकी है — यानी एक लाख का आंकड़ा पार हो गया। और इन गारंटियों की कुल राशि? वो भी कम नहीं — 48,484.26 करोड़ रुपए। यह आंकड़ा अपने आप में बता देता है कि ऋणदाताओं को कितनी बड़ी सुरक्षा-छतरी मिल रही है।

MSME का दबदबा, PSB की अगुवाई
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसका फायदा सबसे ज़्यादा उन्हें मिल रहा है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी — यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)।
जारी की गई कुल गारंटियों में से संख्या के हिसाब से 96 प्रतिशत और कुल गारंटीकृत राशि का 86 प्रतिशत हिस्सा MSME क्षेत्र से जुड़ा है। मतलब साफ है — यह योजना बड़े घरानों की नहीं, बल्कि असली भारत के छोटे उद्यमियों की मददगार बनी है।
वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) ने इस पूरी मुहिम में अगुवाई की है। कुल जारी गारंटियों में से 96 प्रतिशत की जिम्मेदारी इन्हीं बैंकों के कंधों पर है। इसी वजह से योजना को इतनी तेज़ी से ज़मीनी स्तर तक पहुंचाया जा सका।
योजना का मकसद — पश्चिम एशिया संकट की मार से उबरना
ECLGS 5.0 महज एक सरकारी योजना नहीं है — यह एक सोची-समझी रणनीति है। पश्चिम एशिया संकट के चलते देश के कई कारोबारों के सामने नकदी की भारी किल्लत खड़ी हो गई। इससे निपटने के लिए सरकार ने पहले से कर्ज़ लेने वाले उधारकर्ताओं को 2,55,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है।
गारंटी कवरेज की बात करें तो MSME को 100 प्रतिशत और गैर-MSME क्षेत्र को 90 प्रतिशत का कवर दिया जा रहा है। इतने मज़बूत कवरेज की वजह से वित्तीय संस्थान बिना ज़्यादा हिचकिचाहट के कर्ज़ देने को तैयार हो गए हैं।
इतनी तेज़ स्वीकृति के पीछे क्या रहे कारण?
व्यापक संस्थागत नेटवर्क: इस योजना में सिर्फ सरकारी बैंक नहीं, बल्कि निजी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), लघु वित्त बैंक (SFB) और गैर-बैंकिंग वित्त संस्थान (NBFC) — सभी को शामिल किया गया है। इससे दूर-दराज़ के इलाकों तक योजना की पहुंच सुनिश्चित हुई।
सदस्य ऋणदाता संस्थाओं की सक्रियता: MLI यानी Member Lending Institutions वेबसाइट, ईमेल और SMS के ज़रिए अपने ग्राहकों से लगातार संपर्क में हैं और उन्हें योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
लोक संपर्क अभियान: DFS ने NCGTC और PSB Alliance Team के साथ मिलकर नौ जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें राज्य MSME विभाग, वाणिज्य विभाग, बैंक, उद्योग संघ और उद्यमी — सभी को एक मंच पर लाया गया। SLBC के ज़रिए यह संवाद ज़मीन तक पहुंचा। इस अभियान का दूसरा चरण भी जल्द शुरू होने वाला है।
यह उपलब्धि सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है — यह इस बात का सबूत है कि सरकार कारोबारी माहौल को और मज़बूत बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। ECLGS 5.0 जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह छोटे और मझोले उद्यमों की वित्तीय स्थिरता की रीढ़ बनती जाएगी — और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देती रहेगी।
स्रोत: पीआईबी, वित्त मंत्रालय | प्रकाशन तिथि: 10 जून 2026
