राजस्थान सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार कई बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान 35 लाख किसानों को ब्याज मुक्त अल्पकालिक फसली ऋण (Interest Free Short-Term Crop Loan) उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए राज्य बजट में 25,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को समय पर सस्ता ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें खेती के लिए निजी साहूकारों या महंगे कर्ज पर निर्भर न रहना पड़े। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
अब तक 75 लाख से ज्यादा किसानों को मिला लाभ
राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नई सरकार के गठन के बाद से 30 जून 2025 तक केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से 75.52 लाख किसानों को लगभग 42,131 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त अल्पकालिक फसली ऋण वितरित किया जा चुका है।
सरकार का दावा है कि इस पहल का लाभ प्रदेश के लाखों किसानों तक पहुंचा है और खेती के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिलने से कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
FY26 के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान
राज्य बजट में वर्ष 2025-26 के दौरान 35 लाख किसानों को कुल 25,000 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त शॉर्ट-टर्म फसल ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को बुवाई, खाद, बीज, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए आवश्यक पूंजी आसानी से मिल सकेगी।
इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को भी राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें अक्सर खेती के लिए समय पर ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
मध्यकालीन और दीर्घकालीन ऋण भी किए गए वितरित
केवल अल्पकालिक फसल ऋण ही नहीं, बल्कि सहकारी बैंक किसानों को अन्य प्रकार के ऋण भी उपलब्ध करा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय सहकारी बैंकों ने इसी अवधि में 805 करोड़ रुपये से अधिक के मध्यकालीन (Medium-Term) ऋण भी वितरित किए हैं।
वहीं राजस्थान राज्य सहकारी बैंक और प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के माध्यम से लगभग 232 करोड़ रुपये के दीर्घकालीन (Long-Term) ऋण भी किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। इन ऋणों का उपयोग कृषि उपकरण खरीदने, सिंचाई सुविधाएं विकसित करने और अन्य कृषि निवेश के लिए किया जा सकता है।
सहकारी समितियों का नेटवर्क भी हुआ मजबूत
सहकारिता विभाग ने राज्य में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार नई सहकारी समितियों का गठन किया है। सरकार के अनुसार, 30 जून 2025 तक राजस्थान में 600 से अधिक नई सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी हैं।
इन समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण, कृषि सेवाएं और अन्य सहकारी योजनाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच पहले से बेहतर हुई है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ की भावना के साथ काम कर रही है। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ अब बड़े स्तर पर आम लोगों तक पहुंच रहा है और सरकार भविष्य में भी किसानों के हित में ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाती रहेगी।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार की इस पहल से लाखों किसानों को बिना ब्याज के फसल ऋण मिलने का रास्ता आसान होगा। समय पर ऋण उपलब्ध होने से किसान खेती की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे और महंगे कर्ज से बच पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज मुक्त फसल ऋण, सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के विस्तार और कृषि वित्त को मजबूत करने जैसी पहलें राज्य के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
