देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले भारतीय सेना के जवान और अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों, अनुशासन और समर्पण के लिए जाने जाते हैं। सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं के मन में अक्सर यह सवाल होता है कि अलग-अलग रैंक पर कार्यरत सैनिकों और जूनियर अधिकारियों को कितना वेतन मिलता है। इसी बीच 8वें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाओं के बीच सेना की कुछ प्रमुख बेसिक रैंकों की वर्तमान पे-लेवल संरचना एक बार फिर चर्चा में है।
भारतीय सेना में वेतन व्यवस्था केंद्र सरकार के पे मैट्रिक्स के आधार पर तय होती है। किसी भी सैनिक का मूल वेतन उसकी रैंक और संबंधित पे-लेवल के अनुसार निर्धारित किया जाता है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, सैन्य सेवा वेतन, जोखिम भत्ता, परिवहन भत्ता और अन्य सुविधाएं अलग से मिलती हैं, जिससे कुल मासिक आय और अधिक हो जाती है।
सिपाही (Sepoy) से शुरू होता है सैन्य सफर
भारतीय सेना में सबसे शुरुआती रैंकों में सिपाही या सैनिक (Sepoy/Soldier) का पद आता है। यह पद पे लेवल-3 के अंतर्गत रखा गया है। इस स्तर पर मूल वेतन 21,700 रुपये से शुरू होता है। सेना में भर्ती होने वाले अधिकांश जवान अपने करियर की शुरुआत इसी रैंक से करते हैं।
लांस नायक को मिलता है अगला स्तर
सिपाही के बाद पदोन्नति मिलने पर जवान लांस नायक (Lance Naik) बनता है। यह रैंक लेवल-3 और लेवल-4 दोनों संरचनाओं में देखी जाती है। इस पद पर मूल वेतन 21,700 रुपये से लेकर 25,500 रुपये तक हो सकता है, जो कर्मचारी की स्थिति और वेतन स्तर पर निर्भर करता है।
नायक रैंक पर बढ़ता है वेतन
लांस नायक के बाद नायक (Naik) का पद आता है। यह भारतीय सेना की महत्वपूर्ण गैर-कमीशंड रैंकों में से एक माना जाता है। नायक पद को लेवल-4 और लेवल-5 में रखा गया है। इस रैंक पर बेसिक सैलरी 25,500 रुपये से शुरू होकर 29,200 रुपये तक पहुंच सकती है।
हवलदार की जिम्मेदारी और वेतन
नायक के बाद अगली प्रमुख रैंक हवलदार (Havildar) की होती है। यह सेना में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाली महत्वपूर्ण रैंक मानी जाती है। हवलदार को लेवल-5 और लेवल-6 के अंतर्गत रखा गया है। इस पद पर मूल वेतन 29,200 रुपये से शुरू होकर 35,400 रुपये तक हो सकता है।
जूनियर कमीशंड अधिकारी की शुरुआत
हवलदार के बाद सैनिकों के लिए जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) कैडर में प्रवेश का अवसर आता है। इस श्रेणी की पहली रैंक नायब सूबेदार (Naib Subedar) होती है। यह पद पे लेवल-6 में शामिल है और इसका मूल वेतन 35,400 रुपये निर्धारित है।
नायब सूबेदार बनने के बाद सैनिक प्रशासनिक और नेतृत्व संबंधी अधिक जिम्मेदारियां निभाता है तथा अधीनस्थ जवानों का मार्गदर्शन भी करता है।
सूबेदार और सूबेदार मेजर का वेतन
JCO कैडर में अगली रैंक सूबेदार (Subedar) की होती है। यह पद पे लेवल-7 के अंतर्गत आता है और इसका बेसिक वेतन 44,900 रुपये से शुरू होता है।
इसके बाद सूबेदार मेजर (Subedar Major) की रैंक आती है, जिसे JCO कैडर की सबसे वरिष्ठ रैंक माना जाता है। यह पे लेवल-8 में शामिल है और इस पद पर मूल वेतन 47,600 रुपये निर्धारित है।
अधिकारी वर्ग की शुरुआत लेवल-10 से
सेना में कमीशंड अधिकारियों की वेतन संरचना अलग होती है। अधिकारी वर्ग का प्रारंभ पे लेवल-10 से होता है। लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर और उससे ऊपर की रैंकें इसी अधिकारी वर्ग का हिस्सा होती हैं। इन पदों पर वेतन और भत्ते जवानों एवं जूनियर अधिकारियों की तुलना में अधिक होते हैं।
केवल बेसिक पे नहीं, कई अन्य सुविधाएं भी
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऊपर बताए गए आंकड़े केवल बेसिक पे (मूल वेतन) को दर्शाते हैं। सेना के जवानों और अधिकारियों को इसके अतिरिक्त महंगाई भत्ता (DA), सैन्य सेवा वेतन (MSP), फील्ड एरिया अलाउंस, हाई एल्टीट्यूड अलाउंस, राशन सुविधा, चिकित्सा सुविधाएं, कैंटीन लाभ और पेंशन संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।
इसी कारण वास्तविक मासिक वेतन मूल वेतन से काफी अधिक हो सकता है। सेवा क्षेत्र, तैनाती स्थान और रैंक के अनुसार कुल आय में अंतर देखने को मिलता है।
8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं निगाहें
वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों और रक्षा कर्मियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी टिकी हुई हैं। यदि भविष्य में वेतन संरचना में बदलाव होता है, तो सेना के जवानों और अधिकारियों के मूल वेतन तथा भत्तों में भी संशोधन देखने को मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल भारतीय सेना की विभिन्न रैंकों के लिए लागू पे-लेवल और मूल वेतन संरचना यही है, जिसके आधार पर सैनिकों और जूनियर अधिकारियों को वेतन प्रदान किया जाता है।
