आरबीआई का नया फैसला, सहकारी बैंकों के निदेशकों को 10 साल के कार्यकाल के बाद लेना होगा ‘ब्रेक’

RBI Cooperative Banks Cooling-Off Period: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सहकारी बैंकों (Cooperative Banks) के कामकाज और प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। आरबीआई ने शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के निदेशकों (Directors) के लिए ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ (विराम अवधि) के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है।

क्या है यह नया नियम?

सीधे शब्दों में कहें तो, अगर कोई व्यक्ति किसी शहरी सहकारी बैंक (UCB) या ग्रामीण सहकारी बैंक (RCB) के बोर्ड में लगातार 10 साल तक** निदेशक (Director) के पद पर काम कर चुका है, तो उसके बाद उसे एक अनिवार्य ‘ब्रेक’ लेना होगा। इसी ब्रेक को ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ कहा गया है। यह फैसला बैंकिंग नियमों (बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949) का सही से पालन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

नियम लागू करने से पहले मांगी गई थी राय

आरबीआई ने यह फैसला अचानक लागू नहीं किया है। इससे पहले 8 जनवरी 2026 को आरबीआई ने इस नियम का एक ड्राफ्ट (मसौदा) जारी किया था। इसका मकसद बैंकों और आम जनता से इस नए नियम पर उनकी राय और सुझाव लेना था।

सुझावों के बाद जारी हुए अंतिम नियम

लोगों और हितधारकों से मिले सुझावों की आरबीआई ने गहराई से जांच की। इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट में कुछ जरूरी बदलाव किए गए और अब इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।

(सुझावों का पूरा विवरण नियम के साथ जोड़े गए अनुलग्नक में दिया गया है।)

आरबीआई द्वारा जारी किए गए दो नए दिशा-निर्देश

सुझावों को शामिल करने के बाद, रिज़र्व बैंक ने आज आधिकारिक तौर पर निम्नलिखित दो संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक – अभिशासन) संशोधन दिशा-निर्देश, 2026
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक – अभिशासन) संशोधन दिशा-निर्देश, 2026

आरबीआई के इस कदम से सहकारी बैंकों के प्रबंधन में लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के काबिज रहने की परंपरा पर लगाम लगेगी। इससे बैंकों के प्रशासन में ताज़गी आएगी और काम अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

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स्त्रोत: https://m.rbi.org.in/hindi/scripts/PressReleases.aspx?ID=54643

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