bob EMERGENCY CREDIT LINE GUARANTEE SCHEME 5.0: अरे भई, धंधा चलाना कोई बच्चों का खेल थोड़े ही है! कभी कच्चा माल मंगाना है, तो कभी कारीगरों को पगार देनी है। ऐसे में अगर बिज़नेस का कैश-फ्लो थोड़ा भी डगमगाए, तो माथे पर सिकन आ ही जाती है। लेकिन अगर आप एक व्यापारी हैं, तो अब रुपयों की टेंशन को कहिए ‘टा-टा, बाय-बाय’! क्योंकि व्यापारियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) लेकर आया है bob इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 (ECLGS 5.0)।
यह स्कीम खासतौर पर हमारे MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) भाइयों और अन्य कारोबारियों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। अगर आपको अपना काम-काज चालू रखने के लिए एक्स्ट्रा वर्किंग कैपिटल (नकद पैसा) चाहिए, तो ये स्कीम आपका पूरा साथ देगी।
इस स्कीम की सबसे मुख्य बातें (Key Benefits)
कुछ भी गिरवी रखने का झंझट नहीं (Collateral-Free): लोन लेने में सबसे बड़ी सिरदर्दी होती है कि बैंक के पास गिरवी क्या रखें? इस स्कीम में आपको अपनी कोई भी संपत्ति गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं है।
सरकारी गारंटी का भरोसा: MSMEs को NCGTC की तरफ से 100% गारंटी कवर मिलता है और नॉन-MSMEs के लिए यह 90% है। सबसे अच्छी बात? इसके लिए आपको कोई एक्स्ट्रा ‘गारंटी फीस’ नहीं देनी है।
न फाइल का खर्चा, न पहले चुकाने पर जुर्माना: अक्सर लोन पास कराने में प्रोसेसिंग फीस कट जाती है, लेकिन यहाँ प्रोसेसिंग फीस बिल्कुल जीरो (NIL) है। और तो और, अगर आपके पास मुनाफा जल्दी आ गया और आप लोन समय से पहले चुकाना चाहते हैं, तो कोई प्री-पेमेंट चार्ज (जुर्माना) भी नहीं लगेगा।
आराम से चुकाने की आज़ादी: पैसा चुकाने के लिए आपको भरपूर समय मिलता है। MSME और नॉन-MSME के लिए मोरेटोरियम और लोन चुकाने की अवधि 5 साल रखी गई है। वहीं, अगर आप एविएशन (Aviation) सेक्टर से जुड़े हैं, तो आपको 7 साल तक का समय मिलेगा।
फ़ास्ट-ट्रैक लिक्विडिटी (तुरंत पैसा): व्यापार में समय ही पैसा है! इसलिए बैंक आपको फ़ास्ट-ट्रैक लिक्विडिटी सपोर्ट देता है, ताकि बिना लंबे इंतज़ार के पैसा आपके धंधे में लग सके।
ध्यान देने योग्य बात
किसी भी स्कीम का फायदा उठाने से पहले अपने दस्तावेज़ पूरे रखें। लोन पर लागू ब्याज दर मोरेटोरियम की बारीकियों और अन्य नियमों व शर्तों (Terms & Conditions) की पक्की जानकारी के लिए एक बार अपनी नज़दीकी बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा (Branch) में जाकर अधिकारी से ज़रूर बात कर लें या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें।


